Future of Cinema & TV – कुछ सालों में सिनेमा और टीवी का भविष्य ऐसे बदनले वाला है।

लॉकडाउन में बेतहाशा नौकरियां गईं हैं, सैलरी काटी गई है। वे नौकरी‌शुदा लोग जो पांच-छह दिन काम से हुई थकावट मिटाने सिनेमाघर जाते थे, उनकी संख्या कम हो जाएगी। OTT ने DTH को करीब-करीब खत्म होने की कगार पर ढकेल दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में OTT एंटरटेनमेंट की दुनिया का सबसे ताकतवर खिलाड़ी बनने जा रहा है।

भारत में सिनेमा-टीवी का भविष्य:1000 सिनेमाहॉल बंद हो सकते हैं।

3 साल में OTT पर 50 करोड़ सब्सक्राइबर्स होंगे।

भाषा का देखे तो सिर्फ हिन्दी और इंग्लिश ही नहीं। इसके अलावा मराठी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, पंजाबी समेत दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में वीडियो स्ट्रीमिंग, म्यूजिक, पॉडकास्ट वाले 95 से ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म लॉन्च हो चुके हैं।

ऐसे में OTT की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि सिनेप्रेमियों की थाली में कई तरह के पकवान परोसने के साथ बेहतरीन स्वाद पर ध्यान लगाए। बहरहाल, अभी OTT पर तीन खास किस्म का कंटेंट है। पहला, दुनियाभर में पहले से बने टीवी शो, वेब शो, फिल्‍में। इन्हें डब कर के अलग-अलग भाषाओं में दिखाया जा रहा है। दूसरा, ओरिजिनल्स, इसमें नई फिल्में और नए शोज बन रहे हैं। तीसरा, म्यूजिक और पॉडकास्ट।

पीडब्‍ल्यूसी की रिपोर्ट कहती है कि भारत में OTT का बाजार 2018 में केवल 4,464 करोड़ का था। 2023 में 11,976 करोड़ रुपए का हो जाएगा। सीधा-सा मतलब है या तो प्रोड्यूसर्स को OTT की डिमांड समझनी होगी या फिर वे इंडस्ट्री से बाहर होने लगेंगे। सलिल कुमार अंड सीधे कहते हैं कि आने वाले दिनों में सिनेमा और टीवी के कई दुकानदारों की दुकान बंद होने वाली है।

OTT प्लेटफॉर्म में किसी को जबरन कुछ नहीं दिखाया जा सकता। कंटेंट में दम होगा तभी लोग पूरा देखेंगे। नहीं तो ऑडियंस आधे में बंद कर के आगे बढ़ जाएगी।..

अब आने वाले समय में देखा जाएगा की आखिर OTT कितने ज्यादा पैर पसारता है और टीवी , सिनेमा का कैसा हाल होता है।

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