World Malala Day : शिक्षा के हक के लिए लड़ने वाली मलाला आखिर है कौन जानें

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने युवा कार्यकर्ता के सम्मान में 12 जुलाई मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) के जन्मदिन पर मलाला दिवस (Malala Day) के रूप में घोषित कर दी थी. वहीं मलाला यूसुफजई ने साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) भी जीता था. मलाला युसुजई के कुछ कर गुजरने का हौंसला उन्हें खास बनाते हैं.

वहीं बता दे कि सबसे कम उम्र में नोबल पुरस्कार जीतने वाली मलाला शिक्षा के हक के लिए लड़ रही है. 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान के एक शिक्षक जियादुददीन युसूफजई (Ziyaduddin Yousafzai) के यहां मलाला का जन्म हुआ था. वहीं उस समय लड़कियों को स्कूल भेजने का चलन नहीं था, पर मलाला अपने बड़े भाई के साथ स्कूल जाती थी.

वहीं इस बीच तालिबान (Taliban) ने पाकिस्तान (Pakistan) के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया इसके बाद ही उन्होंने स्कूलों को तबाह करना शुरू कर दिया. तालिबान (Taliban) ने 2001 से 2009 के बीच चार सौ स्कूलों को तबाह कर दिया. जिसमे से 70 फीसदी स्कूल लड़कियों के ही थे. वहीं इसके बाद से ही लड़कियों के घर से बाहर निकलने और स्कूल जाने पर पाबंदी लगा दी गई.

वहीं बीबीसी उर्दू (BBC Urdu) पर ‘गुल मकई’ ने दुनिया को तालिबान के शासन में जिंदगी के बारे में बताया. इसके साथ ही उन्होंने लड़कियों और महिलाओं की जिंदगी के बारे में भी बताया. 2009 में बीबीसी उर्दू की वेबसाइट पर इस पोस्ट ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया. वहीं कुछ समय तक यह रहस्य ही रहा कि गुल मकई कौन है, लेकिन दिसंबर 2009 में गुल मकई की हकीकत खुलने के बाद मलाला तालिबान के निशाने पर आ गई.

Malala Yousafzai in the cover story of British Vogue.
Malala Yousafzai in the cover story of British Vogue.

वहीं साल 2012 में तालिबानी उस बस में घुस गए जिसमें 14 साल की मलाला युसूफजई इम्तिहान देकर लौट रही थी. इसके बाद ही उन्होंने मलाला के सिर पर गोली मार दी. पाकिस्तान और फिर लंदन में इलाज के बाद मलाला की जान बचाई गई.

वहीं आपको बता दे कि महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में लगी 16 वर्षीय पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफजई ने शिक्षा में लैंगिक समानता की आवश्यकता पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मुख्यालय में एक भावपूर्ण भाषण दिया था. साल 2008 से ही मलाला ने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के अधिकारों की वकालत करना शुरू किया.

वहीं बर्मिंघम (Birmingham) के अनुसार, उन्होंने ‘मलाला फंड’ की स्थापना की, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है जो युवा लड़कियों को स्कूल जाने में मदद करता है. उन्होंने “आई एम मलाला” नाम से एक पुस्तक का सह-लेखन भी किया, जो एक अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर बन गई.

वहीं ज्ञात हो कि मलाला ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं. 2012 में, पाकिस्तान सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार से सम्मानित किया. 2014 में मलाला नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की प्राप्तकर्ता बनीं. इसके साथ ही उन्हें कनाडा की मानद नागरिकता से सम्मानित किया गया है और वह कनाडा में हाउस ऑफ कॉमन्स को संबोधित करने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति थीं.

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