Toofaan Movie Review : मृणाल ठाकुर और फरहान की फिल्म हुई रिलीज़, बॉक्सर बन कर छाए फरहान

डायरेक्टर : राकेश ओमप्रकाश मेहरा (Rakeysh Omprakash Mehra)
ऐक्टर : फरहान अख्‍तर,मृणाल ठाकुर,परेश रावल,मोहन अगाशे,दर्शन कुमार (Farhan Akhtar, Mrinal Thakur, Paresh Rawal, Mohan Agashe, Darshan Kumar)
श्रेणी : Hindi, ड्रामा, स्‍पोर्ट्स
अवधि : 2 Hrs 43 Min
रेटिंग : 2/5

तूफान (Toofaan) फिल्म एक ऐक्‍शन ड्रामा स्‍पोर्ट्स फिल्‍म है। वहीं इसके लीड रोल में फरहान अख्‍तर (Farhan Akhtar) और मृणाल ठाकुर (Mrunal Thakur) हैं। वहीं यह फिल्म कि कहानी उनके ही किरदार अजीज अली (Farhan Akhtar) उर्फ अज्‍जू भाई के इर्द-गिर्द घूमती है।

अज्‍जु एक बदमाश है जो एक बड़े अपराधी का गुर्गा है। वो वसूली के साथ साथ मारपीट भी करता है, पर उसकी जिंदगी रातों-रात बदल जाती है, क्‍योंकि उसे डॉ. अनन्‍या से प्‍यार हो जाता है।

डॉ. अनन्‍या के किरदार में मृणाल ठाकुर (Mrunal Thakur) नजर आई हैं। वह एक अच्‍छी लड़की है, जो सही और गलत का फर्क समझती है।

वहीं डॉ. अनन्‍या अजीज अली से कहती है कि वह खुद चुन ले कि उसे अज्‍जू वसूली भाई बनना है या अजीज अली, एक सम्‍मानित बॉक्‍सर?

अजीज के घर के पास एक जिम मालिक रहते है, जो अजीज को लेजेंड बॉक्‍स मुहम्‍मद अली के वीडियो दिखाते हैं, और कहते हैं कि, ‘बॉक्‍सिंग और भाईगीरी में यही फर्क है। बॉक्‍स‍िंग एक खेल है, जिसके लिए टेक्‍न‍िक की जरूरत होती है। वहीं अजीज को देखते हुए उसे बॉक्‍स‍िंग कोच नाना प्रभु (परेश रावल) के पास भेज दिया जाता है जो दादर में रहते हैं। इस फिल्म में नाना प्रभु ही अजीज अली को ‘तूफान’ का नाम देते हैं। लेकिन गुरु और चेले के रिश्‍तों में खटास रहती है।

वहीं अजीज और नाना प्रभु का रिश्ता कुछ निजी कारणों से बिगड़ जाता है। इस फिल्म के डायरेक्‍टर के पास कहने को बहुत कुछ है एक प्रेम कहानी है, कट्टरता है, एक बॉक्सर बनने की जिद है और एक एथलीट के बदनामी से छुटकारा पाने की कहानी है।

‘तूफान’ (Toofaan) फिल्म एक बेहद ही सिंपल सी स्‍टोरी है, जिसे उससे भी सरल तरीके से दिखाया गया है। इस फिल्म के मूल में प्रेम कहानी है, लेकिन बॉक्‍स‍िंग फिल्‍म को गति देती है। हालांकि, कई बार ऐसा लगता है कि एक चीज दूसरे को काट भी रही है।

फिल्म कि कहानी का फोकस एक पारंपरिक प्रेम कहानी, सामाजिक ताना-बाना माता-पिता की नाराजगी और मुक्केबाजी पर है।

कई बार ऐसा लगता है कि कहानी धार्मिक सहिष्णुता, सहानुभूति और पूर्वाग्रह जैसे मुद्दों पर बात करना चाहती है, लेकिन ऐसा ही होता है।

वहीं इस फिल्म में परेश रावल (Paresh Rawal) ने बेहतरीन काम किया है। वो इस भूमिका में जम रहे हैं। वहीं इस फिल्म में मृणाल ठाकुर ने अपनी भूमिका के साथ न्‍याय किया।

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