3 MAY 2021

By Anupriya choubey 

जानें कैसे महात्‍मा बुद्ध ने मौन रहकर बदल दी एक व्‍यक्ति की मनोदशा

एक दिन महात्मा बुद्ध शांत से बैठे थे साथ ही उनके सामने उनके शिष्यों की मंडली बैठी थी, वहीं सभी चुप थे।

उसी बीच एक व्यक्ति गुस्से में महात्मा बुद्ध के पास आया और उन्हें नफरत से देखते हुए एक तरफ थूक दिया।

उस शांत वातारवण में एकाएक खलबली मच गई। आसपास मौजूद बुद्ध के शिष्य क्रोधित होकर उस व्यक्ति की तरफ दौड़े। लेकिन बुद्ध ने इशारे से शिष्यों को शांत रहने को कहा। 

मगर शिष्य महात्मा बुद्ध जैसे महान व्यक्तित्व के साथ इस तरह के अपमानजनक व्यवहार को पचा नहीं पा रहे थे। उन्होंने उस नादान इंसान को पकड़ कर बुद्ध के सामने ला खड़ा किया।

महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को शांत और नियंत्रित होने का निर्देश दिया और उस व्यक्ति की ओर देखते रहे। उनके चेहरे के भाव में कोई परिवर्तन नहीं था।

कुछ पलों के बाद उन्होंने उस गुस्सैल व्यक्ति से बड़े ही प्यार से पूछा, ‘आपको और कुछ कहना है?’ वह व्यक्ति बिना कुछ बोले तुरंत वहां से चला गया।

उस व्यक्ति के जाने के बाद बुद्ध के परम शिष्य आनंद ने उनसे पूछा, ‘भगवन, वह व्यक्ति आपका इतना अपमान करके चला गया फिर भी आपने उसे कुछ नहीं कहा।’ महात्मा बुद्ध कुछ बोले नहीं, मौन रह गए। 

अगले दिन सुबह-सुबह वही व्यक्ति फिर महात्मा बुद्ध के पास आया और उनके चरणों में गिर गया। उसकी आंखों से आंसू की धारा बह रही थी। 

महात्मा बुद्ध ने पास खड़े आनंद से कहा, ‘देखा आनंद! कल भी इस व्यक्ति को शब्द नहीं मिल रहे थे और अब भी इसकी वही अवस्था है। पर अब न तो यह कल वाला आदमी रह गया है और न मैं वही हूं।

हमें ऐसी स्थिति में गुस्से और क्रोध से काम नहीं लेना चाहिए, बल्कि माहौल के शांत होने का इंजतार करना चाहिए।’

अधिक जानकारी और  समाचार के लिए