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07 July 2021

By Anupriya Choubey 

Mahadev के बारे में रोचक तथ्य

भगवान शिव अपने गले में सर्प धारण करते हैं| यह सर्प उनके गले में तीन बार लिपटे रहता है जो भूत, वर्तमान एवं भविष्य का सूचक है|

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समुद्र मंथन के दौरान शिव ने जहर को निगल लिया था| देवी पार्वती इस जहर को उनके गले में ही रोक दिया जिसके बाद यह नीले रंग में बदल गया। तब से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा|

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भगवान शिव अपने हाथ में त्रिशूल धारण करते हैं| शिव का त्रिशूल मानव शरीर में मौजूद तीन मूलभूत नाड़ियों बायीं, दाहिनी और मध्य का सूचक है| इसके अलावा त्रिशूल इच्छा, लड़ाई और ज्ञान का भी प्रतिनिधित्व करता है|

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भगवान शिव अर्धचन्द्र को आभूषण की तरह अपनी जटा के एक हिस्से में धारण करते है। इसलिए उन्हें “चंद्रशेखर” या “सोम” कहा गया है|

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सभी मंदिरों में आपको भगवान शिव की मूर्ति नहीं दिखती होगी। इसके बजाय वहाँ एक काले या भूरे रंग का शिव लिंग होता है। यह एक पत्थर है जोकि भगवान शिव के अस्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है|

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यह एक छोटे से आकार का ड्रम है जोकि भगवान शिव के हाथ में रहता है और इसीलिए भगवान शिव को “डमरू-हस्त” कहा जाता है| डमरू के दो अलग-अलग भाग एक पतले गले जैसी संरचना से जुड़े होते हैं| 

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भगवान शिव अपने गले में रूद्राक्ष की माला पहनते है जोकि रूद्राक्ष पेड़ के 108 बीजों से मिलकर बनी है| इसके पीछे कहानी यह है कि जब भगवान शिव ने गहरे ध्यान के बाद अपनी आँखें खोली, तो उनकी आँख से आंसू की बूंद पृथ्वी पर गिर गयी और पवित्र रूद्राक्ष के पेड़ में बदल गया।

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भगवान शिव के प्रतीकों में से एक उनका तीसरा नेत्र है जोकि उनके माथे के बीच में है| ऐसा माना जाता है कि जब वह बहुत गुस्से मे होते हैं तो उनका तीसरा नेत्र खुल जाता है और फिर प्रलय का आगमन होता है| 

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